
मरुधर गूंज, बीकानेर (23 जुलाई 2026)।
ज्योतिष और विज्ञान की दृष्टि से साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण बेहद महत्वपूर्ण होने जा रहा है। आगामी 12 अगस्त को अंतरिक्ष में एक पूर्ण सूर्य ग्रहण का अद्भुत नजारा दिखाई देगा।
इस दुर्लभ खगोलीय घटना के दौरान चंद्रमा, सूर्य को पूरी तरह से ढक लेगा, जिससे दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय ही अचानक अंधेरा छा जाएगा और रात जैसा माहौल बन जाएगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, यह ग्रहण भले ही भारत में दिखाई न दे, लेकिन इसका प्रभाव सभी 12 राशियों के जातकों पर पड़ेगा।
सूर्य ग्रहण : समय और तारीख
भारतीय समयानुसार, साल 2026 का यह दूसरा सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात 11 बजकर 17 मिनट पर प्रारंभ होगा। इसका समापन अगले दिन यानी 13 अगस्त की सुबह 04 बजकर 25 मिनट पर होगा। रात के समय होने के कारण यह भारत में अदृश्य रहेगा।
सूतक काल को लेकर क्या हैं नियम?
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से यूरोप, आइसलैंड, ग्रीनलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और आर्कटिक के क्षेत्रों में पूर्ण रूप से दिखाई देगा। भारत में इस ग्रहण की दृश्यता शून्य होने के कारण यहाँ सूतक काल प्रभावी नहीं माना जाएगा। इसके चलते देश में पूजा-पाठ, धार्मिक अनुष्ठानों या रोजमर्रा के कार्यों पर कोई पाबंदी लागू नहीं होगी और मंदिर भी खुले रहेंगे।
कर्क राशि में हलचल, दिखेगा ब्रह्मांडीय प्रभाव
ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, अगस्त में लगने वाला यह सूर्य ग्रहण चंद्रमा के स्वामित्व वाली कर्क राशि में लगने जा रहा है। भले ही यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, लेकिन ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, किसी भी बड़े ग्रहण का ब्रह्मांडीय और ऊर्जात्मक असर पृथ्वी के सभी जीवों और राशियों पर कम से कम 15 दिनों तक बना रहता है। यह समय कुछ राशियों के लिए जीवन में नई चुनौतियां ला सकता है, तो वहीं कुछ राशियों के लिए सकारात्मक बदलाव और तरक्की के द्वार खोलेगा।
किन देशों में छा जाएगा दिन में अंधेरा?
चूंकि यह एक पूर्ण सूर्य ग्रहण है, इसलिए जब चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह से कवर करेगा, तब पृथ्वी के कुछ हिस्सों में कुछ मिनटों के लिए पूरी तरह से धूप गायब हो जाएगी। वैज्ञानिकों और ज्योतिषियों के अनुसार, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन के उत्तरी हिस्सों, पुर्तगाल के उत्तर-पूर्वी छोटे इलाकों और रूस के कुछ उत्तरी क्षेत्रों में दिन के समय ही पूर्ण अंधकार छा जाएगा, जो प्रकृति का एक अनोखा और रोमांचक नजारा होगा।


