
मरुधर गूंज, बीकानेर (27 जुलाई 2026)।
सावन का महीना भगवान शिव के भक्तों के लिए विशेष होता है। वे अनेक प्रकार से भगवान भोलेनाथ को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं। सावन शिव जी की प्रिय माह है, इसलिए इस महीने में व्रत, पूजा, स्नान, दान, जप, कांवड़ यात्रा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, पंचामृत अभिषेक आदि वो हर उपाय करते हैं, जिससे महादेव की कृपा प्राप्त हो जाए। शिव शंभू के दया करने मात्र से ही प्राणियों का उद्धार हो जाता है, इसलिए हर शिवभक्त कोशिश करता है कि वह सावन में शिव जी का जलाभिषेक करे। विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए रुद्राभिषेक किया जाता है, जिसमें पंचामृत अभिषेक भी शामिल होता है। जानते हैं कि जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में क्या है महत्व?
जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और पंचामृत अभिषेक में महत्व
जलाभिषेक :
जलाभिषेक का अर्थ है जल से अभिषेक। अभिषेक का तात्पर्य स्नान से है यानि जल से भगवान शिव का अभिषेक करना। भगवान शिव का जलाभिषेक आप प्रतिदिन कर सकते हैं। इसमें आपको एक लोटे में पवित्र जल लेकर उसमें गाय का कच्चा दूध, अक्षत्, फूल और बेलपत्र डाल देना है। फिर शिव मंत्र का जाप करते हुए धीरे-धीरे उसे शिवलिंग पर अर्पित करना है। आप चाहें तो केवल जल से भी अभिषेक कर सकते हैं।
रुद्राभिषेक :
रुद्राभिषेक जलाभिषेक से बिल्कुल अलग होता है। यह आप हर दिन नहीं कर सकते हैं, केवल सावन माह को छोड़कर। सावन माह में हर दिन शिववास होता है, ऐसे में आप सावन के किसी भी दिन रुद्राभिषेक करा सकते हैं। लेकिन अन्य महीनों में आपको यह देखना होगा कि किस दिन शुभ फलदायी शिववास है। रुद्राभिषेक गंगाजल, कच्चे दूध, गन्ने के रस, दही, शहद, शक्कर या गुड़ का रस या पंचामृत से होता है। जलाभिषेक की तरह हर कोई इसे नहीं कर सकता है, इसमें पूजा के विशेष नियमों का ध्यान रखना होता है।रुद्राभिषेक आपको किसी योग्य पुरोहित, पंडित या ज्योतिषाचार्य से कराना चाहिए।
पंचामृत अभिषेक :
पंचामृत अभिषेक रुद्राभिषेक का ही एक प्रकार है। इसमें दूध, दही, घी, शहद और शक्कर को मिलाकर पंचामृत बनाते हैं और फिर महादेव का रुद्राभिषेक किया जाता है। इसमें भी रुद्राभिषेक के पूजा नियमों का पालन करते हैं।
जलाभिषेक और रुद्राभिषेक से होने वाले महत्व
जब आप किसी असाध्य रोग, कष्ट, मानसिक पीड़ा, ग्रह दोष, असफलता, गृह क्लेश, कोर्ट केस, अकाल मृत्यु, कालसर्प दोष, वैवाहिक अलगाव आदि से जूझते हैं तो उस समय आपको जलाभिषेक और रुद्राभिषेक करना चाहिए। इससे जीवन में उन्नति होती है, परिवार में सुख, शांति, समृद्धि आती है, व्यक्ति को आरोग्य का वरदान प्राप्त होता है।
किस दिन करा सकते हैं रुद्राभिषेक?
आप रुद्राभिषेक महाशिवरात्रि के दिन कराएं तो बहुत ही उत्तम फलदायी रहेगा। इसके अलावा सावन माह में किसी भी दिन करा सकते हैं या फिर सावन शिवरात्रि, सावन प्रदोष और सावन सोमवार को रुद्राभिषेक कराएं। इसके अलावा हर माह में शिवरात्रि और प्रदोष व्रत आते हैं, उस दिन भी रुद्राभिषेक कराएं। किसी भी माह के उस सोमवार को रुद्राभिषेक करा सकते हैं, जिसमें शुभ फलदायी शिववास हो।


