
मरुधर गूंज, बीकानेर (24 जुलाई 2026)।
देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु 119 दिनों के लिए योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान 25 जुलाई से 20 नवंबर (देवप्रबोधिनी एकादशी) तक चातुर्मास रहेगा और विवाह सहित कई मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाएगा। इस अवसर पर देशभर के विष्णु और विठ्ठल मंदिरों में विशेष पूजा, अभिषेक और शयन आरती का आयोजन किया जाएगा।
देवशयनी एकादशी का क्या है महत्व?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवशयनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और इस दौरान सृष्टि के संचालन का दायित्व भगवान शिव संभालते हैं। चातुर्मास समाप्त होने पर देवप्रबोधिनी एकादशी के दिन भगवान विष्णु जागृत होते हैं।
इसी अवधि में श्रावण मास, रक्षाबंधन, गणेशोत्सव, श्राद्ध पक्ष, शारदीय नवरात्र, शरद पूर्णिमा और दीपावली जैसे प्रमुख पर्व मनाए जाते हैं।
मंदिरों में होंगे विशेष आयोजन
देवशयनी एकादशी पर सुबह ब्रह्म मुहूर्त से भगवान विष्णु का अभिषेक और विशेष पूजन किया जाएगा। शाम को शयन आरती के साथ भगवान को योगनिद्रा के लिए शयन कराया जाएगा। चातुर्मास के दौरान कई स्थानों पर धार्मिक प्रवचन, कथा, भजन-कीर्तन और विभिन्न आध्यात्मिक अनुष्ठान भी आयोजित किए जाएंगे।


