
मरुधर गूंज, बीकानेर (7 अगस्त 2026)।
नवग्रह में भगवान सूर्य ग्रहों के राजा हैं। ज्योतिष शास्त्र में सूर्य का संबंध पिता से होता है। इसके अलावा सूर्य को आत्मा, प्रतिष्ठा, मान-सम्मान, सरकारी नौकरी, नेतृत्व क्षमता, शासन सत्ता और उच्च पद का कारक माना जाता है। जिन लोगों की कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, उनको इन सभी चीजों का लाभ मिलता है। लेकिन जिनका सूर्य खराब होता है, उनके पिता से संंबंध खराब होते हैं, सरकारी नौकरी नहीं मिलती, पद, प्रतिष्ठा से भी वे लोग वंचित रहते हैं, इसके अलावा धन और धान्य का भी संकट झेलते हैं। इसलिए सूर्य को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन सूर्य को अर्घ्य देने की सुझाव दिया जाता है।
अर्घ्य में कौन-कौन सी चीजें मिलाई जाती हैं और क्यों?
- जब सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं तो तांबे के लोटे में जल लेते हैं, उसमें लाल चंदन या रोली, लाल फूल, गेहूं, गुड़ आदि मुख्य रूप से डालते हैं। फिर सूर्य देव के मंत्र का उच्चारण करते हुए धीरे-धीरे जल अर्पित करते हैं।
- जल के अलावा उसमें डाली जाने वाली सभी सामग्री भगवान भास्कर से जुड़ी हुई हैं। लाल चंदन या रोली, लाल फूल, गेहूं, गुड़ आदि सभी चीजें सूर्य देव को प्रिय हैं।
- लाल चंदन या रोली डालकर अर्घ्य देने से पद, प्रतिष्ठा में वृद्धि होती है, वहीं रक्त संंबंधी बीमारी में लाभ मिलता है।
- लाल फूल को सकारात्मकता, ऊर्जा और आत्मबल का प्रतीक माना जाता है। इसको डालने से व्यक्ति का आत्मविश्वास बढ़ता है। सूर्य कृपा से कार्य सफल होते हैं।
- गुड़ सूर्य और मंगल दोनों से जुड़ा है। पारिवारिक कलह दूर होगा, रिश्ते मधुन होंगे, वाणी में मिठास आएगी, बिगड़े काम बनेंगे।
- हल्दी शुभता का प्रतीक है, जिसका संबंध बृहस्पति ग्रह से है। जल में हल्दी डालकर अर्घ्य देने से सेहत ठीक रहती है, विवाह के योग जल्दी बनते हैं। यह उपाय गुरुवार को करते हैं।
- सूर्य के अर्घ्य जल में गेहूं डालने से धन और धान्य में बढ़ोत्तरी होती है। करियर में उन्नति होती है। मान-सम्मान बढ़ता है और सूर्य मजबूत होते हैं।
कौन सामग्री मिलाने से बचना चाहिए?
सूर्य देव को अर्घ्य देने वाले जल में अक्षत्, दूध, नमक, तेल, घी आदि नहीं डालना चाहिए। अक्षत् और दूध का संबंध चंद्रमा से है। रविवार व्रत में नमक वर्जित है। वहीं तेल और घी का संबंध राहु और शनि से है। विपरीत स्वभाव वाले ग्रहों से संबंधित वस्तुएं अर्घ्य के पानी में डालने से बचना चाहिए।
रोजाना और रविवार के सूर्य अर्घ्य में क्या अंतर होता है?
रविवार का दिन सूर्य देव का दिन है। इस दिन आप जिस मनोकामना से अर्घ्य देते हैं, वो जल्दी फलित होता है। यदि आपकी कुंडली में पितृ दोष है, विशेष स्वास्थ्य समस्या, मानसिक तनाव आदि है तो उससे मुक्ति के लिए जल में काला तिल डालकर अर्घ्य दे सकते हैं। लेकिन प्रतिदिन इस उपाय को नहीं करते हैं। बाकी आप सामान्य तरीके से प्रतिदिन अर्घ्य दे सकते हैं।
रविवार के अलावा सूर्य ग्रहण, संक्रांति, अमावस्या और पितृ पक्ष के समय सूर्य को अर्घ्य देते समय जल में काला तिल मिला सकते हैं।


