
मरुधर गूंज, नई दिल्ली (15 अगस्त 2026)।
15 अगस्त 2026 को भारत अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मना रहा है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि 1947 में भारत की स्वतंत्रता के लिए जब 15 अगस्त की तारीख तय हुई, तो देश के बड़े बड़े ज्योतिषियों ने इसे अत्यंत ‘अशुभ’ घोषित कर दिया था…ब्रिटिश भारत के अंतिम वायसराय लॉर्ड माउंटबेटन द्वारा अचानक चुनी गई इस तारीख ने देशभर के पंडितों और ज्योतिषियों में भारी चिंता पैदा कर दी थी। इसके बाद पंडित जवाहरलाल नेहरू ने अपनी राजनीतिक सूझबूझ से एक ऐसा ऐतिहासिक बीच का रास्ता निकाला, जिससे ज्योतिषियों की चिंता भी दूर हो गई और ब्रिटिश हुकूमत का फैसला भी बरकरार रहा।
माउंटबेटन का फैसला और 15 अगस्त की तारीख
शुरुआत में ब्रिटिश सरकार ने भारत को जून 1948 तक सत्ता हस्तांतरित करने का समय तय किया था। लेकिन, 3 जून 1947 को भारत के विभाजन (माउंटबेटन योजना) की घोषणा के बाद, अगले ही दिन (4 जून 1947) माउंटबेटन ने अचानक एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई। उन्होंने ऐलान किया कि ब्रिटेन 15 अगस्त 1947 को भारत छोड़कर चला जाएगा।
माउंटबेटन ने क्यों चुनी यह तारीख?
डोमिनिक लापिएर और लैरी कॉलिन्स की मशहूर किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ के अनुसार, 15 अगस्त की तारीख माउंटबेटन ने बिना किसी से सलाह लिए तय की थी। उनके लिए यह तारीख इसलिए खास थी क्योंकि 15 अगस्त 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध में जापान ने सहयोगी सेनाओं (Allied Forces) के सामने आत्मसमर्पण किया था और माउंटबेटन उस युद्ध में दक्षिण पूर्व एशिया कमांडर थे।
ज्योतिषियों का विद्रोह: क्यों माना गया 15 अगस्त को अशुभ?
माउंटबेटन की घोषणा के बाद बनारस, कलकत्ता (अब कोलकाता) और दक्षिण भारत के प्रमुख ज्योतिषियों ने 15 अगस्त 1947 की ग्रह नक्षत्रों की कुंडली बनाई। कलकत्ता के प्रमुख ज्योतिषी स्वामी मदनानंद समेत देश भर के पंडितों की गणनाओं से निम्नलिखित बातें सामने आईं
- अशुभ वार और नक्षत्र : 15 अगस्त 1947 को शुक्रवार था। वैदिक ज्योतिष में किसी नए राष्ट्र के जन्म या शासन की शुरुआत के लिए शुक्रवार और रविवार को शुभ नहीं माना जाता था।
- ग्रहों की प्रतिकूल स्थिति : ज्योतिषीय गणना के अनुसार, उस समय भारत का जन्म मकर राशि और शनि राहु के प्रतिकूल प्रभाव में हो रहा था। गुरु और शुक्र ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत संकटपूर्ण संकेत दे रही थी।
- अकाल व हिंसा की चेतावनी : स्वामी मदनानंद और अन्य ज्योतिषियों ने माउंटबेटन व नेहरू को पत्र लिखकर चेतावनी दी कि यदि इस अशुभ समय में भारत आजाद हुआ, तो देश को भविष्य में भीषण हिंसा, सूखा, बाढ़ और अकाल का सामना करना पड़ेगा।
ज्योतिषियों का तर्क था कि भारत एक दिन और अंग्रेजों का गुलाम रह ले, लेकिन इतने अशुभ दिन आजाद न हो।
नेहरू का ‘चतुराई भरा’ फैसला : आधी रात में आजादी का राज
सत्ता हस्तांतरण की तैयारियां इतनी आगे बढ़ चुकी थीं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 15 अगस्त की तारीख को बदलना नामुमकिन था। ऐसे में प्रख्यात ज्योतिषी के.एन. राव और दुर्गा दास की पुस्तक ‘India from Curzon to Nehru and After’ के अनुसार, पंडित जवाहरलाल नेहरू ने एक अद्भुत व व्यावहारिक समाधान निकाला:
- तारीख वही, समय बदला : ज्योतिषियों से सलाह ली गई कि क्या 15 अगस्त की तारीख के भीतर ही कोई शुभ मुहूर्त तलाशा जा सकता है?
- अभिजीत मुहूर्त और पुष्य नक्षत्र : ज्योतिषियों ने बताया कि 14 अगस्त की रात (मध्यरात्रि) में वृषभ लग्न का प्रवेश हो रहा था, जो एक ‘स्थिर लग्न’ है। इसके साथ ही पुष्य नक्षत्र और अभिजीत मुहूर्त का दुर्लभ संयोग बन रहा था, जो किसी नए राज्य या साम्राज्य की नींव रखने के लिए सबसे शुभ माना जाता है।
पंचांग और अंग्रेजी कैलेंडर
अंग्रेजी/पश्चिमी कैलेंडर के अनुसार, रात 12:00 बजे तारीख बदलकर 15 अगस्त हो जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, नया दिन सूर्योदय से शुरू होता है। यानी रात 12 बजे तक 14 अगस्त का ही प्रभाव माना जाता है।
‘नियति से वादा’
नेहरू जी ने 14 अगस्त 1947 की दोपहर संविधान सभा की बैठक बुलाई। यह ऐतिहासिक बैठक रात भर चली। जैसे ही घड़ी में रात के ठीक 12 बजे, पश्चिमी कैलेंडर के हिसाब से 15 अगस्त की तारीख शुरू हो गई (जिससे अंग्रेजों की शर्त पूरी हुई) और हिन्दू पंचांग के अनुसार शुभ नक्षत्र का काल जारी रहा (जिससे ज्योतिषियों की मांग पूरी हुई)।




