
मरुधर गूंज, बीकानेर (09 जुलाई 2026)।
हिंदू कैलेंडर का पांचवा माह सावन है। सावन को श्रावण मास भी कहते हैं क्योंकि पूर्णिमा के दिन श्रावण नक्षत्र का संयोग बनता है। सावन माह भगवान शिव को प्रिय है। इसमें लोग व्रत, पूजा, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, मंत्र जाप, हवन आदि करते हैं, ताकि शिव कृपा से जीवन के कष्ट दूर हों और मनोकामनाएं पूरी हों। इस साल सावन माह का शुभारंभ 4 शुभ संयोग में हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस सावन में रुद्राभिषेक कब-कब करा सकते हैं?

30 जुलाई से सावन का शुभारंभ
पंडित विकास सेवग के अनुसार, इस बार अधिकमास के कारण सावन की शुरुआत देर से हो रही है। इस साल सावन का शुभारंभ 30 जुलाई से हो रहा है। पंचांग के अनुसार, 29 जुलाई को रात 8 बजकर 5 मिनट से सावन माह के कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि शुरू हो रही है और 30 जुलाई को रात 9 बजकर 30 मिनट तक विद्यमान रहेगी। उदयातिथि के अनुसार, सावन कृष्ण प्रतिपदा 30 जुलाई को है।
4 शुभ संयोग में सावन की शुरूआत
इस बार सावन माह की शुरूआत 4 शुभ संयोग में हो रही है। सावन के पहले दिन आयुष्मान योग, श्रवण नक्षत्र, सौभाग्य योग और गुरुवार व्रत है।
- आयुष्मान योग :- सावन के पहले दिन प्रात:काल में आयुष्मान योग बन रहा है, जो देर रात 12:05 ए एम तक बना रहेगा। आयुष्मान योग व्यक्ति को उत्तम सेहत, आयु प्रदान करता है। इस शुभ योग में आप शिव पूजा करेंगे तो आपको आरोग्य की प्राप्ति होगी।
- सौभाग्य योग :- सावन कृष्ण प्रतिपदा तिथि में सौभाग्य योग भी बन रहा है, जो 31 जुलाई को 12 बजकर 5 एएम से लेकर देर रात 11 बजकर 54 मिनट तक रहेगा। यह योग सुख और भाग्य में वृद्धि करने वाला है।
- गुरुवार व्रत :- सावन की शुरूआत गुरुवार दिन से हो रही है। गुरुवार के दिन व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। लेकिन सावन का हर दिन शिव पूजा का है। ऐसे में सावन के पहले दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की पूजा का उत्तम अवसर है।
- श्रवण नक्षत्र :- सावन कृष्ण प्रतिपदा के दिन श्रवण नक्षत्र है। श्रवण नक्षत्र के स्वामी ग्रह चंद्रमा हैं, वहीं श्रवण नक्षत्र के देवता भगवान विष्णु हैं। यह नक्षत्र मकर राशि में स्थित होता है। ऐसे में इसमें चंद्रमा और शनि की एनर्जी होती है।
सावन में जलाभिषेक का है विशेष महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सावन में गंगाजल, दूध एवं स्वच्छ जल से शिवलिंग का अभिषेक, बेलपत्र, धतूरा, भांग, चंदन, अक्षत, शहद तथा 108 बिल्वपत्र अर्पित करने से भगवान शिव शीघ्र प्रसन्न होते हैं। रुद्राभिषेक को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों की निवृत्ति के लिए विशेष फलदायी माना गया है।
नाग पंचमी सावन में ही पड़ेगा
पंडित विकास सेवग के अनुसार, सावन में नाग पंचमी 3 अगस्त (सोमवार), 17 अगस्त (सोमवार) को मनाई जाएगी। इस दौरान भगवान शिव की पूजा अर्चना के साथ नाग-नागिन की पूजा-अर्चना कर इन्हें दूध व लावा अर्पण किया जाता है।
सावन में रुद्राभिषेक की तारीखें
रुद्राभिषेक उस दिन किया जाता है, जिस दिन शिव वास होता है। शिव वास नहीं है तो रुद्राभिषेक नहीं होगा। वैसे पूरे सावन माह में शिव वास होता है तो आप पूरे महीने कभी भी रुद्राभिषेक करा सकते हैं। लेकिन इसमें भी कुछ दिन विशेष होते हैं। जैसे रुद्राभिषेक के लिए सावन सोमवार का दिन बहुत उत्तम होता है। इसके अलावा सावन प्रदोष और सावन शिवरात्रि का दिन भी अत्यंत शुभ है।
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3 अगस्त – पहला सावन सोमवार
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10 अगस्त – दूसरा सावन सोमवार, सोम प्रदोष व्रत
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11 अगस्त – सावन शिवरात्रि
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17 अगस्त – तीसरा सावन सोमवार, नाग पंचमी
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24 अगस्त – चौथा सावन सोमवार
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25 अगस्त – सावन भौम प्रदोष व्रत
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27 अगस्त – सावन पूर्णिमा व्रत


