July 9, 2026
MG NEWS

मरुधर गूंज, बीकानेर (09 जुलाई 2026)।

आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि इस बार बेहद शुभ संयोगों में शुरू होने जा रही है। दरअसल, 15 जुलाई से आरंभ होने वाले इस नौ दिवसीय शक्ति पर्व में हर्षण योग और पुष्य योग का दुर्लभ मेल श्रद्धालुओं के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है। यही वजह है कि प्रमुख देवी मंदिरों में तैयारियां अंतिम चरण में हैं, क्योंकि मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है और नौ दिनों तक विशेष पूजा-अर्चना, माता का नवीन श्रृंगार, भोग, आरती और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन होगा। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि इस बार गुप्त नवरात्रि में बड़ी संख्या में भक्त मां भगवती के दर्शन के लिए पहुंचेंगे।

गुप्त नवरात्रि कब है

ज्योतिषाचार्य पंडित विकास सेवग ने बताया कि पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई को दोपहर 3:12 बजे शुरू होकर 15 जुलाई को सुबह 11:50 बजे तक रहेगी। जिसमें उदया तिथि के आधार पर 15 जुलाई से गुप्त नवरात्रि का शुभारंभ माना जाएगा और पहले दिन कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 5:33 बजे से 10:09 बजे तक रहेगा।

गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की तरह ही महत्वपूर्ण

उन्होंने कहा कि इस वर्ष बुधवार होने के कारण अभिजीत मुहूर्त उपलब्ध नहीं रहेगा, लेकिन हर्षण योग और पुष्य योग में होने वाली घटस्थापना को अत्यंत मंगलकारी माना गया है। वहीं ज्योतिषाचार्य पंडित विकास सेवग ने बताया कि गुप्त नवरात्रि सामान्य नवरात्रि की तरह ही महत्वपूर्ण होती है, लेकिन इसका संबंध विशेष रूप से शक्ति साधना, आध्यात्मिक उन्नति और मन की एकाग्रता से माना जाता है। उन्होंने कहा कि इस बार हर्षण योग और पुष्य योग के संयोग में मां दुर्गा की उपासना करने से साधकों को विशेष आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से विधि-विधान के साथ कलश स्थापना कर दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और दुर्गा चालीसा का पाठ करने की अपील की।

पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना होगी

वही श्री महाकाली मां दु:ख भंजनी मंदिर में 15 से 23 जुलाई तक नौ दिवसीय विशेष धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाएगा, पहले दिन शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना होगी, जिसके बाद प्रतिदिन मां भगवती के विभिन्न स्वरूपों का विशेष पूजन, मनमोहक श्रृंगार, भोग और भव्य आरती की जाएगी। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जाएगा। जबकि 21 जुलाई को अष्टमी के अवसर पर कन्या पूजन का विशेष आयोजन होगा, जिसमें श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग लेंगे।

इसी तरह गुप्त नवरात्रि के दौरान शक्ति साधना का विशेष पर्व मनाया जाएगा। यहां प्रतिदिन मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां त्रिपुर भैरवी, मां छिन्नमस्ता, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला के स्वरूपों की विशेष पूजा-अर्चना होगी।

गुप्त नवरात्रि पूजा विधि

प्रतिदिन माता का नवीन श्रृंगार, विशेष भोग और आरती श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गुप्त नवरात्रि आत्मिक शुद्धि और देवी शक्ति के प्रति समर्पण का पर्व है। पहले दिन श्रद्धालु स्नान के बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल पर मिट्टी के पात्र में जौ बोते हैं और उसके ऊपर जल से भरा कलश स्थापित करते हैं।

आम के पत्ते और नारियल से कलश को सुशोभित कर मां दुर्गा का ध्यान किया जाता है। इसके बाद दीप प्रज्वलित कर पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन और फल अर्पित किए जाते हैं तथा दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या देवी कवच का पाठ किया जाता है। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से की गई यह साधना घर-परिवार में सुख, समृद्धि, शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। यही कारण है कि गुप्त नवरात्रि को शक्ति उपासना का सबसे महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।