October 7, 2026
MG NEWS

मरुधर गूंज, बीकानेर (07 अक्टूबर 2026)।

पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, पैकेज्ड स्नैक्स और मीठे पेय बच्चों को भले ही खूब पसंद आते हों, लेकिन इनका नियमित और जरूरत से ज्यादा सेवन उनकी सेहत के लिए चिंता का कारण बन सकता है। बचपन शरीर के विकास का सबसे महत्वपूर्ण दौर होता है। ऐसे में अगर पौष्टिक भोजन की जगह लगातार हाई-कैलोरी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ लेने की आदत बन जाए, तो बच्चों को जरूरी पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते।

ग्रोथ और हड्डियों के विकास पर पड़ सकता है असर

बचपन में हड्डियों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य अंगों के विकास के लिए प्रोटीन, कैल्शियम, विटामिन और कई अन्य पोषक तत्व जरूरी होते हैं। जंक फूड का ज्यादा सेवन करने से बच्चे का पेट तो भर सकता है, लेकिन शरीर को जरूरी पोषण पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाता।

विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों के रोजाना के भोजन में दूध-दही, दालें, हरी सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, अंडे या अन्य पौष्टिक प्रोटीन स्रोत शामिल करना चाहिए। संतुलित आहार बच्चों की सामान्य ग्रोथ और हड्डियों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

BP और ब्लड शुगर को लेकर भी बढ़ रही चिंता

ज्यादा चीनी, नमक और कैलोरी वाले खाद्य पदार्थों का लगातार सेवन बच्चों में वजन बढ़ने और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। कुछ रिपोर्टों और अध्ययनों में कम उम्र के बच्चों में बढ़ते वजन, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसी समस्याओं को लेकर चिंता जताई गई है।

हालांकि, किसी बच्चे में BP या ब्लड शुगर बढ़ने का कारण केवल जंक फूड को मान लेना सही नहीं होगा। बच्चे की शारीरिक गतिविधि, पारिवारिक इतिहास, कुल खान-पान, वजन और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारणों की भी इसमें भूमिका हो सकती है।

‘ब्लड इन्फेक्शन’ के दावे को समझना भी जरूरी

जंक फूड के सेवन को लेकर ब्लड इन्फेक्शन जैसे दावों की भी चर्चा होती रही है। लेकिन ऐसे दावों को बिना संदर्भ के स्वीकार करना उचित नहीं है। यह देखना जरूरी है कि दावा किस अध्ययन, किस प्रकार के संक्रमण और किन परिस्थितियों पर आधारित है।

सामान्य तौर पर यह कहना सही नहीं होगा कि जंक फूड खाने से हर बच्चे में ब्लड इन्फेक्शन हो जाता है। अगर बच्चे को लगातार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, सुस्ती या संक्रमण के अन्य लक्षण दिखाई दें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

बच्चों की प्लेट में क्या होना चाहिए?

बच्चों को हर तरह के पसंदीदा भोजन से पूरी तरह दूर करने के बजाय संतुलित खान-पान की आदत विकसित करना ज्यादा जरूरी है। उनकी प्लेट में रोजाना अलग-अलग प्रकार के पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जा सकते हैं।

  • मौसमी फल और हरी सब्जियां

  • दालें और अन्य प्रोटीन स्रोत

  • साबुत अनाज

  • दूध, दही या उपयुक्त डेयरी विकल्प

  • अंडे या अन्य पौष्टिक प्रोटीन

पर्याप्त मात्रा में पानी

वहीं, मीठे पेय, पैकेज्ड स्नैक्स और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को रोज की आदत बनाने के बजाय सीमित रखना बेहतर है।

सिर्फ खाना ही नहीं, एक्टिविटी और नींद भी जरूरी

बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए सिर्फ पौष्टिक भोजन ही पर्याप्त नहीं है। उम्र के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि, खेलकूद और पर्याप्त नींद भी बेहद जरूरी हैं। लंबे समय तक स्क्रीन के सामने बैठे रहने और शारीरिक गतिविधि कम होने से भी बच्चों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।

माता-पिता भी बनें बच्चों के लिए उदाहरण

बच्चों की खाने की आदतें घर के माहौल से काफी प्रभावित होती हैं। इसलिए माता-पिता को घर में पौष्टिक भोजन के विकल्प उपलब्ध कराने के साथ खुद भी स्वस्थ खान-पान की आदत अपनानी चाहिए।

अगर बच्चे के वजन, लंबाई-विकास, BP, ब्लड शुगर या खान-पान को लेकर कोई चिंता है, तो इंटरनेट पर मौजूद दावों के आधार पर खुद इलाज करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ या योग्य डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

जंक फूड को पूरी तरह ‘जहर’ बताने के बजाय यह समझना जरूरी है कि समस्या इसके अत्यधिक और नियमित सेवन से पैदा होने वाले असंतुलित खान-पान की है। बच्चों के लिए पौष्टिक भोजन, सीमित प्रोसेस्ड फूड, नियमित खेलकूद, पर्याप्त नींद और संतुलित दिनचर्या उनके स्वस्थ विकास की मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।