
मरुधर गूंज, बीकानेर (19 अगस्त 2026)।
श्रावण महीने में आने वाली पुत्रदा एकादशी को लेकर लोगों में इस बार तारीख को लेकर असमंजस है। कई लोग 23 और 24 अगस्त में से किस दिन व्रत रखना है, इसे लेकर परेशान हैं। इस बार श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त 2026 को रखना सबसे उत्तम रहेगा। एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है, जबकि सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है। ऐसे में यह दिन भगवान विष्णु और भोलेनाथ दोनों की कृपा पाने के लिए खास माना जा रहा है।
मरुधर गूंज से बातचीत में ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र कुमार ने बताया कि पंचांग के अनुसार एकादशी तिथि 23 अगस्त को रात 02 बजे से शुरू होगी और 24 अगस्त को सुबह 04 बजकर 18 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि को मान्यता दिए जाने के कारण श्रावण पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त को रखना उचित रहेगा। एकादशी का व्रत भगवान विष्णु की पूजा के साथ किया जाता है और इस दिन श्रद्धा से पूजा करने पर मन को शांति मिलती है।
संतान की इच्छा रखने वालों के लिए खास
ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र कुमार बताते हैं कि पुत्रदा एकादशी का व्रत खासतौर पर संतान की इच्छा रखने वाले विवाहित जोड़ों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में परेशानी आ रही है या संतान से जुड़ी कोई बाधा महसूस हो रही है, वे इस दिन भगवान विष्णु की श्रद्धा से पूजा कर सकते हैं। इस व्रत में सबसे जरूरी चीज मन की श्रद्धा और साफ भाव है। पूजा के लिए बहुत जटिल विधि करने की जरूरत नहीं होती है।
व्रत के दिन इन बातों का रखें ध्यान
ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र कुमार बताते हैं एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें। घर के पूजा स्थान की सफाई करके भगवान विष्णु की तस्वीर या प्रतिमा के सामने दीपक जलाना चाहिए। इसके बाद मन में व्रत का संकल्प लेना चाहिए और अपनी क्षमता के अनुसार ही व्रत रखना चाहिए।व्रत के दौरान मन को शांत रखना और भगवान विष्णु का ध्यान करना भी जरूरी है।
अन्न त्याग के साथ सात्विक भोजन करें
ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र कुमार ने बताया कि एकादशी व्रत में अन्न का त्याग करने की परंपरा है। इस दौरान लहसुन और प्याज का सेवन भी नहीं करना चाहिए। जो लोग पूरा व्रत नहीं रख सकते हैं, वे अपनी क्षमता के अनुसार फलाहार कर सकते हैं। शाम के समय फल और व्रत में खाए जाने वाले सात्विक भोजन का सेवन किया जा सकता है। व्रत के दौरान मन में अच्छे विचार रखना और किसी के प्रति गलत भावना नहीं रखना भी महत्वपूर्ण है।
सावन में पड़ने से बढ़ जाता है महत्व
ज्योतिषाचार्य पंडित महेन्द्र कुमार बताते हैं कि इस बार की पुत्रदा एकादशी सावन महीने में पड़ रही है, इसलिए इसका धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है। सावन भगवान शिव का महीना है और एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु के साथ भगवान शिव की पूजा करना भी श्रद्धालुओं के लिए शुभ माना जाता है। श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार भगवान शिव और भगवान विष्णु का ध्यान कर सकते हैं।


