
मरुधर गूंज, नई दिल्ली (17 सितम्बर 2026)।
यूपीआई ट्रांजैक्शन पर GST लगाने की खबरों को सरकारी सूत्रों ने गलत बताया है। सूत्रों ने कहा कि यूपीआई पर GST लगाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। उन्होंने साफ किया कि MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट को लेकर सरकार पर किसी तरह का बाहरी दबाव नहीं है। इस मामले में सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्टों में चल रही चर्चाओं को सरकार ने अफवाह करार दिया है।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, MDR से जुड़ी रकम को इनपुट टैक्स क्रेडिट यानी ITC में एडजस्ट किया जा सकेगा। इसका मतलब है कि कारोबारियों को टैक्स क्रेडिट के जरिए इस रकम को सेट ऑफ करने की सुविधा मिल सकती है। अगर आगे चलकर इस व्यवस्था में कोई परेशानी सामने आती है, तो उस पर जीएसटी काउंसिल विचार करेगी।
तो क्या व्यवस्था बनेगी
सूत्रों ने कहा कि यूपीआई पर GST को लेकर अभी चिंता करने की जरूरत नहीं है। सरकार का मानना है कि MDR से जुड़ी व्यवस्था को टैक्स क्रेडिट के साथ जोड़ा जा सकता है। हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कारोबारियों या पेमेंट इकोसिस्टम को किसी तरह की दिक्कत आती है, तो उसे संबंधित मंच पर उठाया जाएगा।
सरकार ने यह भी कहा कि MDR की वजह से कैश ट्रांजैक्शन में बहुत ज्यादा बढ़ोतरी देखने को नहीं मिली है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें भरोसा है कि कारोबारी और ग्राहक यूपीआई का इस्तेमाल बंद करके बड़े पैमाने पर नकद भुगतान की ओर नहीं लौटेंगे। सरकार को डिजिटल पेमेंट के जारी रहने की उम्मीद है।
यूपीआई ट्राजेक्शन में गिरावट की उम्मीद नहीं
सरकारी सूत्रों ने कहा कि 15 अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू होने के बाद यूपीआई ट्रांजैक्शन में गिरावट की उम्मीद नहीं है। सरकार का मानना है कि यूपीआई अब पेमेंट का अहम माध्यम बन चुका है। इसलिए MDR और GST को लेकर चल रही चर्चाओं के बावजूद डिजिटल पेमेंट के इस्तेमाल पर बड़ा असर पड़ने की संभावना नहीं है।
MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने वाले कारोबारी से लिया जाता है। सरकार की ओर से फिलहाल यह स्पष्ट किया गया है कि यूपीआई पर GST लगाने की खबर गलत है और MDR को लेकर कोई बाहरी दबाव नहीं है। अगर टैक्स क्रेडिट या शुल्क से जुड़ी कोई समस्या आती है, तो जीएसटी काउंसिल उस पर फैसला करेगी।


