
मरुधर गूंज, बीकानेर (09 सितम्बर 2026)।
हरतालिका तीज का निर्जला व्रत पति की लंबी आयु और अखंड सौभाग्य की कामना से रखते हैं। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय होता है और दांपत्य जीवन की समस्याएं दूर होती हैं। हरतालिका तीज का व्रत सुहागन महिलाओं के अलावा कुंवारी कन्याएं और विधवा महिलाएं भी रख सकती हैं। हरतालिका तीज हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाते हैं। इसमें व्रत तृतीया तिथि में सूर्योदय से लेकर चतुर्थी के सूर्योदय तक रखा जाता है। उस दौरान अन्न, जल आदि सबका त्याग कर देते हैं।
हरतालिका तीज तारीख
ज्योतिषचार्या पण्डित महेन्द्र कुमार ने बताया कि हरतालिका तीज के लिए भाद्रपद शुक्ल तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7:08 बजे से प्रारंभ होगी और यह 14 सितंबर को सुबह 7:06 बजे तक मान्य रहेगी. तृतीया की उदयातिथि 14 सितंबर को प्राप्त हो रही है, इसलिए हरतालिका तीज 14 सितंबर सोमवार को मनाई जाएगी।
हरतालिका तीज मुहूर्त
जो महिलाएं हरतालिका तीज का व्रत रखेंगी, वे पूजा सुबह में 06:05 ए एम से 07:38 ए एम के बीच कर सकती हैं, उसके बाद सुबह 09:11 ए एम से 10:44 ए एम के बीच कर लें। जिन लोगों के घर हरतालिका तीज की पूजा शाम को होती है, वे लोग सूर्यास्त बाद यानि 06:28 पी एम के बाद कर लें। उस समय चर-सामान्य मुहूर्त शाम 06:28 पी एम से 07:55 पी एम तक रहेगा।
इस साल की हरतालिका तीज रवि योग मनाई जाएगी। 14 सितंबर को रवि योग प्रात:काल 6 बजकर 6 मिनट से दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक है। सूर्य के प्रभाव की वजह से रवि योग में सभी प्रकार के दोष मिट जाते हैं, इसलिए एक शुभ फलदायी योग है।
इसके अलावा उस दिन इंद्र योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 12 बजकर 20 मिनट तक है, उसके बाद वैधृति योग बनेगा, जो पूर्ण रात्रि तक है. व्रत वाले दिन स्वाति नक्षत्र प्रात: काल से लेकर दोपहर 3 बजकर 21 मिनट तक है, उसके बाद से पूरे दिन विशाखा नक्षत्र है।
कब होगा हरतालिका तीज का पारण?
हरतालिका तीज का व्रत सूर्योदय से सूर्योदय तक का होता है। ऐसे में 14 सितंबर को हरतालिका तीज का व्रत सुबह 06:05 ए एम से प्रारंभ हो जाएगा और 15 सितंबर को सुबह 06:06 ए एम तक रहेगा। उसके बाद पारण करके व्रत को पूरा किया जाएगा। जिन महिलाओं को पानी पीना अत्यंत आवश्यक है, वे रात में 12 बजे के बाद पानी पी लेती हैं। इस व्रत के नियमों में बीमार, गर्भवती और बुजुर्ग महिलाओं को छूट है।
हरतालिका तीज का महत्व
हरतालिका तीज के व्रत में महिलाएं माता पार्वती, भगवान शिव और गणेश जी की पूजा करती हैं। शिव और शक्ति की कृपा से अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। पति की आयु बढ़ती है, वहीं दोनों का जीवन सुखमय होता है।


