
मरुधर गूंज, बीकानेर (06 सितम्बर 2026)।
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में होने वाला चुनाव भले ही स्थानीय स्तर का चुनाव है, लेकिन इसके सियासी मायने काफी बड़े माने जा रहे हैं। चुनावी मैदान में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर के साथ कई वार्डों में निर्दलीय और अन्य दलों के उम्मीदवार भी मुकाबले को रोचक बना रहे हैं। ऐसे में यह चुनाव केवल पार्षद चुनने तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि दोनों प्रमुख दलों के बड़े नेताओं की राजनीतिक पकड़ और संगठनात्मक ताकत की भी परीक्षा बन गया है।
बीकानेर नगर निगम में कुल 80 वार्ड हैं और इस बार महापौर पद सामान्य वर्ग के लिए खुला है। आरक्षण की तस्वीर साफ होने के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस दोनों में टिकट को लेकर जोरदार मंथन चला। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रत्याशियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने-अपने वार्ड में मतदाताओं को साधने की है। कई वार्डों में भाजपा-कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है, जबकि कुछ सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी दोनों दलों के समीकरण बिगाड़ने की कोशिश में हैं।
भाजपा ने झोंकी पूरी ताकत
सत्तारूढ़ भाजपा ने बीकानेर निगम चुनाव को गंभीरता से लेते हुए प्रदेश स्तर के नेताओं को प्रचार में उतारना शुरू कर दिया है। पार्टी की रणनीति में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो खास महत्व रखता है। मुख्यमंत्री 6 सितंबर को बीकानेर पहुंचकर भाजपा प्रत्याशियों के समर्थन में रोड शो करेंगे। बीकानेर पूर्व विधायक सिद्धि कुमारी, बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास, जिला अध्यक्ष सुमन छाजेड़, कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, भाजपा युवा नेता वेद व्यास के साथ पार्टी नेताओं के अनुसार इसका उद्देश्य शहर में माहौल बनाने के साथ अधिक से अधिक मतदाताओं तक भाजपा का संदेश पहुंचाना है।
भाजपा के लिए यह चुनाव इसलिए भी अहम है क्योंकि प्रदेश में सत्ता में होने के बावजूद स्थानीय निकाय में जनता का समर्थन किस तरह मिलता है, इसका सीधा संदेश इन परिणामों से जाएगा। मुख्यमंत्री के साथ पार्टी के अन्य बड़े नेता और संगठन के पदाधिकारी भी अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय हैं। प्रदेश भाजपा ने राज्य के 10 नगर निगम क्षेत्रों में बड़े नेताओं के रोड शो और जनसंपर्क का कार्यक्रम तैयार किया है।
कांग्रेस के सामने संगठन और सियासी पकड़ की परीक्षा
दूसरी ओर कांग्रेस भी बीकानेर में मजबूत वापसी की कोशिश में है। कांग्रेस ने बीकानेर निगम चुनाव को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ नेताओं को प्रचार में उतारना शुरू कर दिया है। वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री डॉ. बीड़ी कल्ला, यशपाल गहलोत, मदन गोपाल मेघवाल, पूर्व केबिनेट मंत्री गोविन्द राम मेघवाल के साथ पार्टी नेताओं के उद्देश्य से शहर में माहौल बनाने के साथ अधिक से अधिक मतदाताओं तक कांग्रेस का संदेश पहुंचाना है।
पार्टी ने वार्ड स्तर पर स्थानीय नेताओं और प्रत्याशियों के जरिए मतदाताओं तक पहुंच बनाने पर जोर दिया है। टिकट वितरण के दौरान बड़ी संख्या में दावेदार सामने आने से साफ था कि कांग्रेस में स्थानीय स्तर पर चुनाव को लेकर उत्साह काफी अधिक है। बीकानेर के 80 वार्डों के लिए कांग्रेस में सैकड़ों लोगों ने टिकट की दावेदारी की थी।
कांग्रेस के लिए चुनौती यह है कि टिकट वितरण के बाद सामने आए असंतोष और बगावत को कितना नियंत्रित किया जा सकता है। दूसरी तरफ भाजपा में भी टिकट को लेकर असंतुष्ट दावेदारों और बागियों को साधने की कोशिश हुई है। ऐसे में दोनों दलों के लिए पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के पक्ष में वोट ट्रांसफर करवाना बड़ी चुनौती रहेगा।
9 सितंबर को होगा फैसला
बीकानेर नगर निगम के 80 वार्डों में मतदान 9 सितंबर 2026 को होगा। मतदान का समय सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक रहेगा। मतगणना 14 सितंबर को होगी। चुनावी कार्यक्रम में बदलाव के बाद बीकानेर नगर निगम की मतदान तारीख 11 सितंबर से बदलकर 9 सितंबर की गई थी।
अब चुनाव प्रचार अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है। गलियों और मोहल्लों में प्रत्याशियों का जनसंपर्क तेज हो गया है। कहीं जातीय समीकरण चर्चा में हैं तो कहीं व्यक्तिगत संपर्क, स्थानीय विकास और वार्ड की समस्याएं चुनावी मुद्दा बनी हुई हैं।
कुल मिलाकर बीकानेर का यह स्थानीय चुनाव अब भाजपा बनाम कांग्रेस के साथ-साथ बड़े नेताओं की प्रतिष्ठा की लड़ाई बनता दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का रोड शो भाजपा के लिए शक्ति प्रदर्शन होगा, वहीं कांग्रेस के स्थानीय नेताओं के सामने अपने मजबूत जनाधार को वोट में बदलने की चुनौती होगी। 9 सितंबर को मतदाता अपने फैसले से तय करेंगे कि बीकानेर के 80 वार्डों में किस दल का पलड़ा भारी रहा और किसकी चुनावी रणनीति कामयाब हुई।




