September 21, 2026
MG NEWS

मरुधर गूंज, नासिक-त्र्यंबकेश्वर (21 सितम्बर 2026)।

सिंहस्थ महाकुंभ के शुभारंभ की तैयारियों के तहत 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर नासिक में कुंभ मेला प्रशासन और कुंभ मेला प्राधिकरण की महत्वपूर्ण तैयारी बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता पालकमंत्री एवं कुंभ मेला मंत्री गिरीश महाजन ने की। बैठक में साधु-संतों, महंतों, विभिन्न अखाड़ों के प्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। बैठक में 31 अक्टूबर को होने वाले ध्वजारोहण कार्यक्रम को धार्मिक परंपराओं के अनुरूप भव्य और सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बता दें कि कुंभ मेला सनातन धर्म का सबसे बड़ा और विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक आयोजन माना जाता है। यह मेला प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में निश्चित ज्योतिषीय संयोगों के आधार पर आयोजित होता है।

ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान

सिंहस्थ महाकुंभ के ध्वजारोहण के लिए दो प्रमुख स्थान निर्धारित किए गए हैं। नासिक में रामकुंड घाट और त्र्यंबकेश्वर में कुशावर्त कुंड, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर परिसर से जुड़े क्षेत्र में ध्वजारोहण कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। मंत्री गिरीश महाजन ने बताया कि 31 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 2 मिनट पर नासिक और त्र्यंबकेश्वर में एक ही समय पर ध्वजारोहण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दोनों स्थानों पर एक साथ होने वाला यह कार्यक्रम सिंहस्थ महाकुंभ के औपचारिक शुभारंभ का महत्वपूर्ण चरण होगा। उन्होंने बताया कि एक स्थान पर महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के करकमलों से ध्वजारोहण होने की योजना है, जबकि दूसरे स्थान पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में ध्वजारोहण किया जाएगा. इस अवसर पर केंद्र और राज्य सरकार के कई नेता भी उपस्थित रहेंगे।

महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन

सिंहस्थ कुंभ मेला हिंदू धर्म के सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजनों में शामिल है। देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु इस पवित्र मेले में शामिल होने के लिए पहुंचते हैं। सिंहस्थ का आयोजन मुख्य रूप से उज्जैन, मध्य प्रदेश में क्षिप्रा नदी के तट पर किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सिंहस्थ कुंभ का संबंध गुरु यानी बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश से माना जाता है। इसी वजह से इसे सिंहस्थ कहा जाता है।

कब और कहां लगेगा सिंहस्थ कुंभ?

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेले में देश के अलग-अलग हिस्सों से साधु-संत, अखाड़े, महामंडलेश्वर और श्रद्धालु पहुंचने वाले हैं। मेले में धार्मिक अनुष्ठान, साधु-संतों के दर्शन, प्रवचन और विभिन्न आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। सिंहस्थ के दौरान क्षिप्रा नदी में पवित्र स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालु आस्था के साथ नदी में स्नान कर पूजा-अर्चना करते हैं। उज्जैन स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के कारण भी इस आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है।

सिंहस्थ कुंभ मेले का क्या है महत्व?

पौराणिक मान्यता के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले अमृत कलश को लेकर देवताओं और असुरों के बीच संघर्ष हुआ था। मान्यता है कि अमृत की बूंदें जिन प्रमुख स्थानों पर गिरीं, उनमें उज्जैन भी शामिल है। इसी धार्मिक परंपरा से कुंभ पर्व की आस्था जुड़ी हुई मानी जाती है। सिंहस्थ के दौरान शाही स्नान और प्रमुख स्नान पर्व आकर्षण का केंद्र रहते हैं। अखाड़ों के साधु-संत पारंपरिक रूप से स्नान करते हैं और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उनका दर्शन करते हैं। सिंहस्थ कुंभ केवल धार्मिक आयोजन ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, संत परंपरा और आध्यात्मिक जीवन का बड़ा संगम भी है। यहां अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं से आए लोग एक साथ आस्था और आध्यात्मिकता का अनुभव करते हैं। उज्जैन का सिंहस्थ देश की प्राचीन धार्मिक परंपराओं को जीवंत रूप में देखने का महत्वपूर्ण अवसर माना जाता है।

इस बार नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला

नासिक-त्र्यंबकेश्वर सिंहस्थ कुंभ मेला इस बार 21 महीने का लगने जा रहा है। इस महीने की शुरुआत 31 अक्टूबर 2026 को होगी और समापन 24 जुलाई 2028 को होगा। लगभग दो साल तक चलने वाले इस बार के कुंभ को सिंहस्थ कुंभ कहा जाता है, बाकी जगहों को सिंहस्थ नहीं कहा जाता। यहां पर राजा हर्षवर्धन काल से ही सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता रहा है। जब देवगुरु (गुरु ग्रह) सिंह राशि में प्रवेश करते हैं, तब सिंहस्थ कुंभ का आयोजन होता है।

नासिक कुंभ मेला 2027 : पूरा शेड्यूल

  • ध्वजारोहण : शनिवार, 31 अक्टूबर 2026

  • नगर प्रदक्षिणा : गुरुवार, 29 जुलाई 2027

  • पहला अमृत स्नान : सोमवार, 2 अगस्त 2027

  • दूसरा अमृत स्नान : मंगलवार, 31 अगस्त 2027

  • तीसरा अमृत स्नान (नासिक) : शनिवार, 11 सितंबर 2027

  • तीसरा अमृत स्नान (त्र्यंबकेश्वर) : रविवार, 12 सितंबर 2027

  • समापन समारोह : सोमवार, 24 जुलाई 2028