February 9, 2026
MG NEWS
नौ कुंडीय

मरुधर गूंज, बीकानेर (09 फरवरी 2026)।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, फाल्गुन साल का अंतिम माह होता है और इस माह की अमावस्या का आध्यात्मिक रूप से विशेष महत्व है। फाल्गुन अमावस्या (17 फरवरी 2026) को पितरों की आत्मा की शांति, तर्पण और श्राद्ध के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए उपायों से न केवल पूर्वजों को मोक्ष मिलता है, बल्कि कुंडली में मौजूद पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

फाल्गुन अमावस्या की शुभ तिथि और मुहूर्त

  • तिथि प्रारंभ : 16 फरवरी, सुबह 05:34 बजे से।
  • तिथि समापन : 17 फरवरी, शाम 05:30 बजे तक।
  • अमावस्या तिथि : उदय तिथि के अनुसार 17 फरवरी को मनाई जाएगी।

पितृ दोष के प्रमुख लक्षण

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में पितृ दोष हो, तो उसे जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में परेशानियों का सामना करना पड़ता है, जैसे संतान प्राप्ति में बाधा आना या विवाह में अत्यधिक देरी। नौकरी या व्यवसाय में लगातार आर्थिक नुकसान।

बिना किसी ठोस कारण के परिवार में कलह और अशांति का माहौल। कड़ी मेहनत के बावजूद कार्यों में सफलता न मिलना।

दोष मुक्ति के प्रभावी उपाय

  • पवित्र नदी में स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके पितरों को जल अर्पित करें। इससे जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
  • पीपल के पेड़ में पितरों का वास माना जाता है। अमावस्या पर पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं और 7 या 11 बार परिक्रमा करें।
  • पूजा के पश्चात जरूरतमंदों को काले तिल, अन्न, वस्त्र और धन का दान करें। इससे सुख-समृद्धि बढ़ती है और पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।