May 19, 2026
MG NEWS
नौ कुंडीय

मरुधर गूंज, बीकानेर (08 फरवरी 2026)।

सनातन धर्म में महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। यह पर्व भगवान शिव और मां पार्वती की आराधना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन शिव पूजन से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति आती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। इस वर्ष महाशिवरात्रि 15 फरवरी को मनाई जाएगी।

महादेव का स्वरूप रहस्यमयी और अलौकिक

महादेव का स्वरूप रहस्यमयी और अलौकिक है। जहां अन्य देवता स्वर्ण आभूषण धारण करते हैं, वहीं महादेव भस्म, रुद्राक्ष और सांप को अपने आभूषण के रूप में अपनाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, नागराज वासुकी शिव के परम भक्त थे और हमेशा उनके समीप रहना चाहते थे। समुद्र मंथन के दौरान जब भगवान शिव ने हलाहल विष पिया, तब वासुकी ने भी उसका प्रभाव सहने में उनका साथ दिया। वासुकी की भक्ति से प्रसन्न होकर शिव ने उन्हें अपने गले में धारण करने का वरदान दिया और तभी से वासुकी अमर हो गए।

शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है

भगवान शिव और सांप के इस संबंध का उल्लेख शिव पुराण और स्कंद पुराण में मिलता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, शिव के साथ नाग की पूजा करने से कालसर्प दोष और पितृ दोष से राहत मिलती है। महाशिवरात्रि या सोमवार के दिन चांदी के नाग-नागिन का जोड़ा अर्पित करने से राहु-केतु शांत होते हैं।

धार्मिक विश्वास है कि शिव और नागों की पूजा से धन-धान्य में वृद्धि होती है, रुका हुआ धन वापस मिलता है और जीवन में समृद्धि बनी रहती है।