
कई दावेदारों के नाम चर्चा में, गुटीय समीकरणों के बीच किसके सिर सजेगा महापौर का ताज?
मरुधर गूंज, बीकानेर (14 सितम्बर 2026)।
निकाय चुनाव के परिणाम सामने आने के साथ ही बीकानेर कांग्रेस में अब अगली बड़ी राजनीतिक कवायद शुरू हो गई है। कांग्रेस ने नगर निकाय में बहुमत हासिल कर लिया है और इसके साथ ही पार्टी के भीतर महापौर पद को लेकर लॉबिंग तेज होने लगी है। चुनाव में कांग्रेस के कई प्रमुख संभावित चेहरे जीतकर आए हैं, ऐसे में अब पार्टी नेतृत्व के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नाम पर सहमति बनाने की होगी।
बहुमत मिलने के बाद कांग्रेस के अंदर महापौर पद के लिए कई नामों की चर्चा शुरू हो गई है। इनमें पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला के भतीजे अनिल कल्ला, धर्मवीर नाहटा, मकसूद अहमद, जावेद पड़िहार, अश्विनी मिड्ढा और दिलीप बांठिया प्रमुख रूप से शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा राजनीतिक समीकरणों के आधार पर अन्य नाम भी अंतिम समय में सामने आ सकते हैं।
महापौर पद के लिए बढ़ी दावेदारों की सक्रियता
कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद अब पार्टी के भीतर पार्षदों और नेताओं की सक्रियता बढ़ गई है। सभी प्रमुख दावेदार अपने-अपने स्तर पर समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में कांग्रेस के अंदर बैठकों और राजनीतिक मुलाकातों का दौर तेज होने की संभावना है।
अनिल कल्ला का नाम विशेष रूप से चर्चा में है। बताया जा रहा है कि पश्चिम क्षेत्र के कई पार्षद उनके संपर्क में हैं। वहीं दूसरी ओर अल्पसंख्यक समाज से जुड़े कांग्रेस नेताओं और पार्षदों का एक अलग राजनीतिक समूह बनने की चर्चा भी है। ऐसे में महापौर पद का फैसला केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता के आधार पर नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को ध्यान में रखकर किए जाने की संभावना है।
गुटबाजी बनी तो सामने आ सकता है नया नाम
कांग्रेस के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पार्टी के भीतर मौजूद विभिन्न गुटों और दावेदारों के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए। यदि किसी एक नाम को लेकर सहमति नहीं बनती है और दावेदारों के बीच खींचतान बढ़ती है, तो पार्टी नेतृत्व किसी ऐसे चेहरे पर दांव लगा सकता है जो सभी गुटों के लिए अपेक्षाकृत स्वीकार्य हो।
इसी राजनीतिक गणित में धर्मवीर नाहटा का नाम भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि प्रमुख दावेदारों के बीच सहमति नहीं बनती है तो पार्टी किसी तीसरे विकल्प के रूप में नाहटा के नाम पर विचार कर सकती है।
वहीं पंजाबी समाज के राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए अरविंद मिड्ढा के भाई अश्विनी मिड्ढा का नाम भी चर्चा में आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी नेतृत्व और निर्वाचित पार्षदों के समीकरणों पर निर्भर करेगा।
दिलीप बांठिया भी महापौर पद के मजबूत दावेदारों में गिने जा रहे हैं। उनके नाम को लेकर भी पार्टी के भीतर समर्थन जुटाने की कवायद शुरू होने की चर्चा है।
उपमहापौर पद पर भी नजर
महापौर के साथ-साथ उपमहापौर पद को लेकर भी राजनीतिक गतिविधियां तेज हो सकती हैं। इस पद के लिए चेतना चौधरी और सविता जोशी के नाम चर्चा में बताए जा रहे हैं। हालांकि कांग्रेस की ओर से अभी किसी नाम को आधिकारिक रूप से आगे नहीं किया गया है।
अब कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती
कांग्रेस ने चुनाव में बहुमत हासिल कर अपनी पहली चुनौती पूरी कर ली है, लेकिन असली राजनीतिक परीक्षा अब शुरू होती दिखाई दे रही है। पार्टी को एक ओर सभी निर्वाचित पार्षदों को साथ रखना होगा, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच ऐसा नाम तय करना होगा, जिससे संगठन में असंतोष न बढ़े।
महापौर पद के लिए कई दावेदारों के चुनाव जीतने से मुकाबला दिलचस्प हो गया है। अब देखना यह होगा कि कांग्रेस नेतृत्व किस रणनीति के तहत इस पूरे घटनाक्रम को संभालता है और किस चेहरे को महापौर पद के लिए आगे करता है।
फिलहाल बीकानेर कांग्रेस में सबसे बड़ा सवाल यही है—बहुमत के बाद महापौर का ताज आखिर किसके सिर सजेगा? आने वाले दिनों में होने वाली बैठकों और राजनीतिक समीकरणों से इस सवाल का जवाब सामने आने की उम्मीद है।


