
एकराय बनाने में संकट, नाराज होकर दो पार्षद निकले; मामला प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द डोटासरा तक पहुंचा
बीकानेर। निकाय चुनाव में स्पष्ट बहुमत हासिल करने के बाद भी बीकानेर कांग्रेस में अब महापौर पद को लेकर एकराय बनाने की चुनौती सामने आ गई है। पार्टी के भीतर महापौर पद के नाम को लेकर चल रही कवायद के बीच दो पार्षदों के नाराज होकर बाहर निकलने की खबर ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार पार्षदों की नाराजगी केवल व्यवस्थाओं को लेकर ही नहीं, बल्कि कुछ अन्य राजनीतिक और संगठनात्मक मुद्दों को लेकर भी बताई जा रही है। इसी बीच नवरत्न डागा सहित एक अन्य पार्षद के नाराज होकर निकलने की चर्चा सामने आई है। घटनाक्रम के बाद कांग्रेस के अंदरूनी समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
मामला पहुंचा प्रदेशाध्यक्ष तक
पार्षदों की नाराजगी और महापौर पद को लेकर बन रहे समीकरणों की जानकारी अब कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा तक पहुंच गई है। बताया जा रहा है कि डोटासरा पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से लगातार संपर्क में हैं।
पूर्व मंत्री बी.डी. कल्ला सहित अन्य वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं से भी प्रदेश नेतृत्व की बातचीत होने की जानकारी सामने आ रही है। पार्टी नेतृत्व की कोशिश है कि बहुमत होने के बावजूद किसी तरह की अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने न आए और सभी पार्षदों को एकजुट रखा जा सके।
डोटासरा की ‘क्लोज वॉच’
महापौर पद के लिए कई नाम चर्चा में होने के कारण प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व अब पूरे मामले को बेहद गंभीरता से देख रहा है। प्रदेशाध्यक्ष डोटासरा खुद घटनाक्रम पर क्लोज वॉच रख रहे हैं।
कांग्रेस के सामने चुनौती केवल महापौर का नाम तय करने की नहीं, बल्कि ऐसा नाम सामने लाने की है जिस पर अधिकांश पार्षद सहमत हो सकें। पार्टी नेतृत्व किसी भी तरह की नाराजगी या क्रॉस वोटिंग जैसी स्थिति से बचना चाहता है।
प्रभारी करेंगे पार्षदों से रायशुमारी
अब कांग्रेस प्रभारी की ओर से निर्वाचित पार्षदों से रायशुमारी किए जाने की तैयारी है। पार्षदों की व्यक्तिगत राय और समर्थन का आकलन करने के बाद ही महापौर पद के लिए एक नाम आगे बढ़ाए जाने की संभावना है।
बताया जा रहा है कि रायशुमारी के दौरान पार्षदों की पसंद, सामाजिक समीकरण और पार्टी के भीतर स्वीकार्यता सहित कई पहलुओं को ध्यान में रखा जाएगा। इसके बाद प्रदेश नेतृत्व अंतिम फैसला ले सकता है।
बहुमत के बावजूद चुनौती बड़ी
कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण संख्या बल की स्थिति मजबूत है, लेकिन अब पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती एक नाम पर सर्वसम्मति बनाने की है। कई दावेदारों के नाम चर्चा में होने और अलग-अलग राजनीतिक समीकरण बनने से मामला पेचीदा होता जा रहा है।
फिलहाल कांग्रेस नेतृत्व की नजर नाराज पार्षदों को साधने और सभी को एक मंच पर लाने पर है। रायशुमारी के बाद ही साफ होगा कि महापौर पद के लिए कांग्रेस किस चेहरे पर भरोसा जताती है।
अब निगाहें कांग्रेस प्रभारी की रायशुमारी और प्रदेश नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।


