June 12, 2026
MG NEWS

मरुधर गूंज, वॉशिंगटन/तेहरान (12 जून 2026)।

अमेरिका और ईरान के बीच दो महीनों से ज्यादा समय से सुलग रही बारूद की ढेरी अब उस मुकाम पर पहुंच चुकी है, जहां से कभी भी महाविनाश का रास्ता खुल सकता था। भयावहता के सातवें आसमान पर पहुंच चुके इस खूनी संघर्ष और प्रतिशोध की आग ने पूरी दुनिया को तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया था, जिससे हर देश की सांसें थमी हुई थीं।

हालांकि अब जारी संघर्ष के बीच अंतरराष्ट्रीय गलियारों से एक ऐसी विस्फोटक और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है, जिसने वैश्विक राजनीति में तहलका मचा दिया है। दावा किया जा रहा है कि लगभग तीन महीनों से जारी यह विनाशकारी जंग अब अपने अंतिम अंजाम की ओर है। पर्दे के पीछे चली लंबी कूटनीतिक चालों के बाद यह संभावना बेहद तेज हो गई है कि इस रविवार को दोनों महाशक्तियां मेज पर एक ऐतिहासिक समझौते पर दस्तखत कर सकती हैं।

रविवार को जिनेवा में हो सकती है ‘डील’

वैश्विक समाचार एजेंसी ‘ब्लूमबर्ग न्यूज’ की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले इस समझौते के लिए स्विट्जरलैंड के खूबसूरत शहर जिनेवा को संभावित जगह के रूप में चुना गया है।

इतना ही नहीं रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस समझौते पर हस्ताक्षर की औपचारिकता इसी रविवार को पूरी की जा सकती है। इस खबर के सामने आने के बाद से दुनिया भर ने राहत की सांस ली है कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से चल रहा युद्ध अब खत्म हो जाएगा।

‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ पर ईरान ने किया साफ रुख

हालांकि जहां एक तरफ समझौते की खबरें तेज हैं, वहीं दूसरी तरफ ईरान ने रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अपना रुख कड़ा कर लिया है। ईरान की सरकारी मीडिया और आधिकारिक समाचार एजेंसी ‘आईआरएनए’ ने शुक्रवार को साफ कर दिया कि अमेरिका के साथ जो समझौता होने जा रहा है, उसके तहत तेहरान इस महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते पर से अपना नियंत्रण बिल्कुल नहीं छोड़ेगा।

समझौते के मसौदे को लेकर ईरान का दावा

इसके साथ ही ईरान की समाचार एजेंसी ने ‘वर्तमान मसौदे की व्यापक रूपरेखा’ का हवाला देते हुए कहा कि इस समझौते के मसौदे में ईरान पर ऐसा कोई दबाव या बाध्यता नहीं है कि वह इस समुद्री मार्ग पर अपना अधिकार छोड़ दे।

ईरान ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई से पहले जो स्थिति थी, उसे वैसे ही बहाल करने की ईरान की कोई प्रतिबद्धता इस मसौदे में नहीं है। ईरान ने सीधे शब्दों में कहा है कि ईरान इस मसौदे में जलडमरूमध्य के प्रबंधन को छोड़ने का कोई वादा नहीं कर रहा है।