

मरुधर गूंज, बीकानेर (10 जनवरी 2026)।
लोहड़ी का पर्व न केवल लोक-परंपरा और ऋतु परिवर्तन का उत्सव है, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी यह अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हर साल 13 जनवरी को मनाया जाने वाला यह त्योहार सूर्यदेव के मकर राशि में प्रवेश यानी उत्तरायण होने की प्रक्रिया का संकेत देता है। इस साल लोहड़ी पर ग्रहों की युति कई शुभ योगों का निर्माण कर रही है, जो करियर, धन और सामाजिक प्रतिष्ठा के लिए फलदायी होंगे।
मंगलादित्य योग
लोहड़ी के दिन सूर्य और मंगल की नौवें भाव में उपस्थिति से ‘मंगलादित्य योग’ बनेगा। ज्योतिष शास्त्र में नौवां भाव भाग्य और धर्म का होता है। यह योग व्यक्ति के साहस, निर्णय क्षमता और आत्मविश्वास में वृद्धि करेगा। विशेषकर उच्च शिक्षा और विदेश यात्रा के इच्छुक जातकों के लिए यह समय सुनहरे अवसर लेकर आ सकता है।
शुक्रादित्य राजयोग
दसवें भाव (कर्म भाव) में सूर्य और शुक्र की युति से ‘शुक्रादित्य राजयोग’ का निर्माण हो रहा है। यह योग करियर में उन्नति और मान-सम्मान दिलाने वाला माना जाता है। हालांकि, इस दौरान संबंधों में मधुरता बनाए रखने के लिए वाणी पर संयम रखना आवश्यक होगा।
सूर्यदेव का मकर राशि में विशेष प्रभाव
लोहड़ी के समय सूर्य धनु राशि के अंतिम चरण में होते हैं और कर्म प्रधान मकर राशि में प्रवेश की तैयारी करते हैं। मकर राशि अनुशासन और स्थिर प्रगति का प्रतीक है। जब सूर्य इस दिशा में बढ़ते हैं, तो व्यक्ति की नेतृत्व क्षमता और कार्यक्षेत्र में पकड़ मजबूत होती है।
दान और संकल्प का महत्व
मान्यता है कि लोहड़ी की पवित्र अग्नि में तिल और गुड़ अर्पित करने से नकारात्मकता का नाश होता है। इस दिन तिल, गुड़, मूंगफली और कंबल का दान करने से सूर्य और शनि देव की कृपा प्राप्त होती है। ज्योतिषीय अनुसार, इस मौके पर किए गए संकल्प और दान आने वाले समय में सुख, समृद्धि और मानसिक शांति का आधार बनते हैं।


