

मरुधर गूंज, बीकानेर (15 फरवरी 2026)।
हस्तरेखा शास्त्र एक प्राचीन और गहरा विज्ञान है, जो हमारी हथेलियों की लकीरों के माध्यम से भविष्य और व्यक्तित्व का दर्पण दिखाता है। ये रेखाएं केवल लकीरें नहीं, बल्कि हमारे प्रारब्ध और कर्मों का लेखा-जोखा होती हैं। हस्तरेखा शास्त्र में कुछ ऐसे दुर्लभ संयोगों का वर्णन है, जो सीधे दैवीय शक्तियों से संबंध दर्शाते हैं। इन्हीं में से एक अत्यंत प्रभावशाली और कल्याणकारी योग है – ‘शिव योग’।
माना जाता है कि जिस व्यक्ति की हथेली में ‘शिव योग’ का निर्माण होता है, उस पर स्वयं भगवान भोलेनाथ की विशेष छत्रछाया रहती है। ऐसे जातक न केवल भौतिक संसार में सफलता के झंडे गाड़ते हैं, बल्कि आध्यात्मिक पथ पर भी उच्च शिखर प्राप्त करते हैं।
कैसे बनता है हथेली में ‘शिव योग’?
हस्तरेखा विशेषज्ञों के अनुसार, शिव योग का निर्माण हथेली की विशिष्ट रेखाओं और पर्वतों की स्थिति पर निर्भर करता है। मुख्य रूप से…
- यदि आपकी भाग्य रेखा दोषरहित और स्पष्ट हो।
- यदि गुरु पर्वत पर स्पष्ट त्रिशूल का चिह्न बना हो।
- यदि हृदय रेखा के अंत में त्रिशूल की आकृति उभरती हो, तो यह जातक के भीतर शिवत्व और करुणा का प्रतीक माना जाता है।
शिव योग के प्रमुख लक्षण और उनके अर्थ
हथेली के ये विशेष चिह्न महादेव के अस्त्रों और उनके स्वरूप से प्रेरित होते हैं…
- त्रिशूल का चिह्न : गुरु पर्वत या अंगूठे के मूल में त्रिशूल का होना जातक को नेतृत्व शक्ति प्रदान करता है। ऐसे लोग हर क्षेत्र में विजयी होते हैं।
- अर्धचंद्र : जब दोनों हथेलियों को जोड़ने पर हृदय रेखा मिलकर एक पूर्ण ‘आधा चांद’ बनाती है, तो इसे महादेव के मस्तक के चंद्रमा का आशीर्वाद माना जाता है। ऐसे जातक शांत चित्त, आकर्षक व्यक्तित्व और तेज बुद्धि के धनी होते हैं।
- डमरू का निशान : हथेली के मध्य भाग (हथेली के मैदान) या मंगल पर्वत पर डमरू की आकृति होना अत्यंत दुर्लभ है। यह चिह्न जातक को अचानक धन लाभ, अपार ख्याति और कलात्मक सफलता दिलाता है।
शिव योग का जातक के जीवन पर प्रभाव
शिव योग से अलंकृत जातकों का जीवन सामान्य लोगों की तुलना में अधिक सुरक्षित और प्रतिष्ठित होता है। माना जाता है कि…
- अदृश्य सुरक्षा चक्र: कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी इन्हें किसी दैवीय शक्ति का साथ मिलता है, जो इन्हें संकटों से बाहर निकाल लेती है।
- शत्रु विजय: ऐसे लोग स्वभाव से निडर होते हैं और अपने विरोधियों पर सहज ही विजय प्राप्त कर लेते हैं।
- शुद्ध अंतरात्मा: इनकी प्रवृत्ति परोपकारी होती है। ये लोग समाज कल्याण और दूसरों की सेवा में सदैव तत्पर रहते हैं।
- मान-सम्मान: समाज में इन्हें उच्च पद और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।


