March 17, 2026
MG NEWS
नौ कुंडीय

मरुधर गूंज, बीकानेर (17 मार्च 2026)।

सनातन धर्म में आस्था और आत्मशुद्धि का प्रतीक ‘वासंती नवरात्र’ इस वर्ष 19 मार्च से शुरू होने जा रहा है। 19 मार्च को कलश स्थापना के साथ ही हिंदू नववर्ष (नवसंवत्सर 2083) का भी आगाह होगा।

इस बार विशेष बात यह है कि देवी दुर्गा का आगमन डोली पर और विदाई हाथी पर हो रही है। ज्योतिषीय दृष्टि से देवी का डोली पर आगमन देश और दुनिया के लिए अशुभ व चुनौतीपूर्ण माना जाता है। यह समाज में आर्थिक अस्थिरता, राजनीतिक उथल-पुथल और स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का संकेत देता है।

चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा का हाथी पर प्रस्थान (विदाई) अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि शुक्रवार को विदाई होने के कारण माता हाथी पर लौटेंगी, जो अच्छी वर्षा, बेहतर कृषि, सुख-समृद्धि और आर्थिक मजबूती का संकेत है। यह शुभ संकेत आने वाले समय में खुशहाली और सुखद अंत की भविष्यवाणी करता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से नवरात्रि में माता का वाहन उस दिन के आधार पर तय होता है, जिस दिन नवरात्रि शुरू होती है। शास्त्रों के अनुसार ”दोलायां मरणं विभो” अर्थात यदि माता डोली पर आती हैं, तो इसे अस्थिरता, महामारी और राजनीतिक उथल-पुथल का प्रतीक माना जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से डोली एक मानव वाहन है। जब ब्रह्मांड की शक्ति देवी दुर्गा डोली जैसे अस्थिर वाहन पर सवार होती हैं, तो यह भविष्य में जन-धन की हानि या प्राकृतिक आपदाओं की संभावना का संकेत माना जाता है।

ज्योतिषीय दृष्टि से चैत्र नवरात्रि को वासंती नवरात्रि भी कहा जाता है, क्योंकि यह वसंत ऋतु में आती है। इन नौ दिनों में सात्विक भोजन, अखंड ज्योति का ध्यान और ब्रह्मचर्य का पालन करना शुभ माना जाता है।

कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त

चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ इस बार 19 मार्च, गुरुवार को घट स्थापना यानी कलश स्थापना के लिए प्रातः 06:52 बजे से 07:43 बजे तक का समय विशेष शुभ रहेगा। श्रद्धालु निम्नलिखित शुभ समय में घटस्थापना कर सकते हैं-

  • गुली काल मुहूर्त – सुबह 09:06 से 10:33 बजे तक।

  • अभिजीत मुहूर्त – दोपहर 11:38 से 12:24 बजे तक।

  • चर, लाभ और अमृत मुहूर्त – सुबह 10:33 से दोपहर 02:57 बजे तक।

19 मार्च को मां शैलपुत्री की पूजा होगी। 20 मार्च को मां ब्रह्मचारिणी, 21 मार्च को मां चंद्रघंटा, 22 मार्च को मां कुष्मांडा, 23 मार्च को मां स्कंदमाता, 24 मार्च को मां कात्यायनी, 25 मार्च को मां कालरात्रि, 26 मार्च को मां महागौरी की पूजा एवं अष्टमी पर कन्या पूजन तथा 27 मार्च को मां सिद्धिदात्री की पूजा होगी।

27 मार्च को महानवमी का संयोग

इस वर्ष चैत्र शुक्ल नवमी 27 मार्च को मनाई जाएगी। पुनर्वसु और पुष्य नक्षत्र के दुर्लभ सुयोग में महानवमी और रामनवमी का पर्व एक ही दिन संपन्न होगा। इस दिन माँ सिद्धिदात्री की पूजा के साथ-साथ भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। पुष्य नक्षत्र होने के कारण इस दिन भूमि, वाहन और आभूषण की खरीदारी को विशेष शुभ माना गया है।

भूल से भी न करें ये काम

चैत्र नवरात्रि में मांस और मदिरा का बिलकुल सेवन नहीं करना चाहिए। इस दौरान प्याज और लहसुन से भी दूरी बनाकर रखें। तामसिक भोजन जीवन में परेशानियां खड़ी करता है। चैत्र नवरात्रि में जब माता की आराधना कर रहे हैं, तो किसी का भी दिल नहीं दुखाना चाहिए। किसी को अपशब्द नहीं बोलने चाहिए। नवरात्रि में इस बात का बहुत ध्यान रखें कि दिन में न सोएं क्योंकि ऐसा करने से देवी मां नाराज होती हैं।