February 16, 2026
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नौ कुंडीय

मरुधर गूंज, बीकानेर (05 सितंबर 2025)।

वर्ष 2025 का आखिरी चंद्र ग्रहण 7 सितंबर, रविवार को लगने जा रहा है। इसे भारत समेत कई देशों में देखा जा सकेगा। इस साल कुल चार ग्रहण होंगे, लेकिन भारतीय सिर्फ़ यही चंद्र ग्रहण देख पाएँगे। खास बात यह है कि यह भाद्रपद पूर्णिमा को लगेगा और इसे ब्लड मून भी कहते हैं।

चंद्र ग्रहण की तिथि और समय

ग्रहण का स्पर्श (प्रारंभ) – रात्रि 9:57 बजे

ग्रहण का मध्य – रात्रि 11:41 बजे

ग्रहण का मोक्ष (समाप्ति) – मध्यरात्रि 1:27 बजे (8 सितंबर)

इस दौरान सूतक काल 9 घंटे पहले यानी दोपहर 12:57 बजे से शुरू होकर मध्यरात्रि 1:27 बजे तक प्रभावी रहेगा।

भारत के ये शहर बनेंगे साक्षी

यह चंद्र ग्रहण भारत के ज़्यादातर हिस्सों में दिखाई देगा। खासकर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, पुणे, लखनऊ, हैदराबाद और चंडीगढ़ जैसे बड़े शहरों में लोग इसे आसानी से देख पाएंगे। अगर मौसम साफ़ रहा तो इसे नंगी आँखों से भी देखा जा सकेगा, किसी विशेष उपकरण की आवश्यकता नहीं होगी।

धार्मिक मान्यताएँ और सूतक काल

  • धार्मिक दृष्टि से चंद्र ग्रहण शुभ नहीं माना जाता है।
  • सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहते हैं और पूजा-पाठ वर्जित होता है।
  • 8 सितंबर की सुबह स्नान-दान के बाद मंदिरों के कपाट खोल दिए जाएँगे।
  • इस बार चंद्र ग्रहण पितृ पक्ष के पहले दिन यानी भाद्रपद पूर्णिमा को लग रहा है, इसलिए आचार्यों के अनुसार, ग्रहण से पहले श्राद्ध कर्म और पितृ तर्पण कर लेना चाहिए।

ज्योतिषीय दृष्टि से प्रभाव

ज्योतिषियों का मानना ​​है कि यह ग्रहण कुछ राशियों के लिए शुभ और कुछ के लिए अशुभ हो सकता है। ग्रहण के समय किया गया जप, ध्यान और दान कई गुना फल देता है।

सूर्य ग्रहण 2025 का संयोग

इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन खगोलीय दृष्टि से भी विशेष रहेगा। सूर्य ग्रहण 21 सितंबर 2025 को महालया अमावस्या के दिन होगा। ज्योतिषियों के अनुसार, चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण का यह संयोग दुर्लभ माना जाता है।