March 12, 2026
MG NEWS
नौ कुंडीय

मरुधर गूंज, बीकानेर (12 मार्च 2026)।

भगवान विष्णु की भक्ति और महादेव की शक्ति के संगम का पर्व ‘पापमोचनी एकादशी’ इस वर्ष 15 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। शास्त्रों के अनुसार, यह एकादशी न केवल श्रीहरि की कृपा पाने का दिन है, बल्कि महादेव को प्रसन्न कर जन्मों के पापों से मुक्ति पाने का भी दुर्लभ अवसर है।

चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की इस पावन तिथि पर यदि भगवान विष्णु के साथ-साथ शिवलिंग पर कुछ विशेष सामग्रियां अर्पित की जाएं, तो जीवन के जटिल कष्टों और शनि दोष तक से राहत मिल सकती है।

शुभ मुहूर्त (15 मार्च 2026)

  • ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:55 से 05:43 तक

  • अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:06 से 12:54 तक

  • विजय मुहूर्त : दोपहर 02:30 से 03:18 तक

  • गोधूलि मुहूर्त : शाम 06:27 से 06:51 तक

  • व्रत पारण का समय : 16 मार्च को सुबह 06:36 से 09:43 के बीच

महादेव को प्रसन्न करने के अचूक उपाय

पापमोचनी एकादशी पर श्रीहरि के साथ शिव साधना का विशेष महत्व है। आइए जानते हैं शिवलिंग पर क्या अर्पित करने से कौन सा फल मिलता है:

शमी के पुष्प: रोग और दोष से मुक्ति

पापमोचनी एकादशी के दिन नीलकंठेश्वर महादेव का स्मरण करते हुए शिवलिंग पर शमी के फूल चढ़ाएं। माना जाता है कि इस उपाय से शरीर के असाध्य रोगों और कुंडली के दोषों का शमन होता है।

बिल्वपत्र और शहद: आरोग्य का वरदान

शिवलिंग पर जल अर्पित करते समय बिल्वपत्र पर थोड़ा शहद लगाकर महादेव को समर्पित करें। शास्त्रों के अनुसार, शहद और बेलपत्र का यह संयोग भक्त के समस्त पापों का नाश कर उसे उत्तम आरोग्य (अच्छे स्वास्थ्य) का वरदान प्रदान करता है।

चावल और काले तिल: शनि दोष से राहत

यदि आप शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या से परेशान हैं, तो इस दिन कच्चे चावल में काले तिल मिलाकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। पूजन के पश्चात इन तिल-मिश्रित चावलों को किसी जरूरतमंद को दान करने से शनि देव की पीड़ा शांत होती है।

गाय का शुद्ध घी: संकटों का नाश

शुद्ध गाय के घी से शिवलिंग का अभिषेक करना अत्यंत कल्याणकारी माना गया है। यह उपाय न केवल घर की नकारात्मकता दूर करता है, बल्कि जीवन में आने वाले आकस्मिक संकटों से भी रक्षा करता है।

महामृत्युंजय का प्रभाव

पूजा के अंत में शिवलिंग के समक्ष बैठकर महामृत्युंजय मंत्र का 108 बार जाप अवश्य करें। एकादशी की ऊर्जा और इस मंत्र का प्रभाव मिलकर जीवन के बड़े से बड़े संकट को टालने की क्षमता रखते हैं। पापमोचनी एकादशी का व्रत 16 मार्च को रखा जाएगा। व्रत का पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में करना श्रेष्ठ रहता है।