

मरुधर गूंज, बीकानेर (07 फरवरी 2026)।
महाशिवरात्रि भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन पर्व माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बेलपत्र के साथ-साथ शमी पत्र भी भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है।
ज्योतिष शास्त्र में बताया गया है कि महाशिवरात्रि पर शमी पत्र से जुड़े उपाय करने से न केवल आर्थिक संकट दूर होता है, बल्कि करियर, व्यापार और विवाह से जुड़ी समस्याओं का भी समाधान मिलता है।
शमी पत्र क्यों है खास?
सनातन धर्म में भगवान शिव को ‘भोलेनाथ’ कहा गया है, जो थोड़े से जल और पत्तों से ही प्रसन्न हो जाते हैं। जहां बेलपत्र शिव पूजा का मुख्य अंग है, वहीं शमी पत्र का अर्पण विशेष फलदायी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, शमी वृक्ष में सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है, जो जीवन की बाधाओं को दूर करने में सहायक है।
आर्थिक तंगी और कर्ज से मुक्ति के उपाय
अगर आप लंबे समय से धन की कमी या कर्ज की समस्या से जूझ रहे हैं, तो महाशिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर 108 शमी पत्र अर्पित करें। अर्पण के समय ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें। मान्यता है कि इससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है और आय के नए स्रोत खुलते हैं।
विवाह में देरी और बाधाओं का समाधान
जिन लोगों के विवाह में बार-बार रुकावटें आ रही हैं, उनके लिए महाशिवरात्रि विशेष फलदायी दिन माना गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शिवलिंग पर दूध और जल अर्पित कर शमी पत्र चढ़ाने से मंगल और शनि दोष शांत होते हैं। कहा जाता है कि कुंवारी कन्याएं यदि माता पार्वती और भगवान शिव का ध्यान कर शमी पत्र अर्पित करें, तो उन्हें योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
करियर और व्यापार में तरक्की
ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के अनुसार, करियर में सफलता और व्यापार में उन्नति के लिए महाशिवरात्रि के दिन उत्तर दिशा की ओर मुख करके भगवान शिव को शमी पत्र अर्पित करना शुभ माना जाता है। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है और कार्यक्षेत्र में आ रही नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
शनि दोष और साढ़ेसाती से राहत
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव शनि देव के गुरु हैं। जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या का प्रभाव है, उन्हें महाशिवरात्रि पर शमी पत्र के साथ काले तिल शिवलिंग पर अर्पित करने चाहिए। इससे शनि दोष का प्रभाव कम होता है और जीवन में स्थिरता आती है।
शमी पत्र अर्पित करने के नियम
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शमी पत्र को अर्पित करने से पहले स्वच्छ जल या गंगाजल से धो लें।
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अपनी मनोकामना के अनुसार 11, 21, 51 या 108 की संख्या में पत्र चढ़ाएं।
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शमी पत्र हमेशा शिवलिंग के बाईं ओर या जलाधारी के पास रखें।
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ध्यान रखें कि पत्ते सूखे, कटे-फटे या खराब न हों।


