
मरुधर गूंज, नई दिल्ली (01 जनवरी 2026)।
नई दिल्ली। बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसक घटनाएं रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। ताजा मामला शरियतपुर जिले का है, जहां एक हिंदू दवा विक्रेता खोकन चंद्र दास (उम्र करीब 45-50 साल) पर भीड़ ने बर्बर हमला किया। हमलावरों ने पहले उसे तेज धारदार हथियारों से घायल किया, फिर पेट्रोल डालकर जिंदा जलाने की कोशिश की।
घटना 31 दिसंबर की देर शाम की बताई जा रही है। खोकन दास घर लौट रहे थे जब अचानक हमलावरों ने उन्हें घेर लिया। बेरहमी से पीटा गया, चाकू से वार किए गए।आग लगने के क्षणों में उन्होंने पास के तालाब में छलांग लगा दी, जिससे उनकी जान बच गई। गंभीर रूप से घायल खोकन को स्थानीय लोगों ने बचाकर अस्पताल पहुंचाया, जहां उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।
यह घटना हाल के सप्ताहों में हिंदू समुदाय पर हुए हमलों की श्रृंखला में चौथी है। इससे पहले 18 दिसंबर को मयमनसिंह जिले में दीपू चंद्र दास नाम के युवक को कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला और शव को पेड़ से लटकाकर जला दिया।
24-25 दिसंबर को राजबारी जिले में अमृत मंडल (उर्फ सम्राट) को उगाही के आरोप में भीड़ ने पीटकर हत्या कर दी। हालांकि, अंतरिम सरकार ने इसे आपराधिक गतिविधि से जुड़ा बताया और सांप्रदायिक रंग देने की कोशिशों की निंदा की।
ये घटनाएं बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता पैदा कर रही हैं।अंतरिम सरकार ने हमलों की निंदा की है और जांच के आदेश दिए हैं, लेकिन मानवाधिकार संगठनों व पड़ोसी देशों में इनकी बढ़ती संख्या को लेकर फिक्र जताई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि राजनीतिक अस्थिरता और उग्र तत्वों के सक्रिय होने से ऐसी घटनाएं बढ़ रही हैं।
बांग्लादेश में हिंदू आबादी करीब 8% है और हाल के वर्षों में अल्पसंख्यकों पर हमलों की रिपोर्ट्स में इजाफा हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय भी इन घटनाओं पर नजर रखे हुए है।


